भारत एवं विश्व के इतिहास में 01 नवम्बर का एक खास महत्व है ,क्योकि इस दिन अनेक ऐसी घटनाये घटी जो मानव समाज को काफी प्रभवित किया /आईये जानते है 01 नवम्बर को कौन कौन सी मुख्य घटनाये घटी =-
(1) 01 नवम्बर 1765 को ब्रिटेन के उपनिवेशों में स्टैम्प एक्ट लागू किया गया.
(२) 01 नवम्बर 1984 को भारत की तत्काली प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद देश में सिख विरोध दंगे भड़क गया.
(3)01 नवम्बर 1958 को तत्कालीन सोवियत संघ ने परमाणु परीक्षण किया.
(4)01 नवम्बर 1950 को भारत में पहला भाप इंजन चितरंजन रेल कारखाने में बनाया गया.
स्कॉट्लैंड में रहने वाला एक छोटा बालक अपनी
दादी की रसोई में बैठा हुआ था. चूल्हे पर बर्तन
चढ़े हुए थे और वह उनमें खाना बनता देखते
हुए बहुत सारी चीज़ों के होने का कारण
तलाश रहा था. वह हमेशा ही यह जानना
चाहता था कि हमारे आसपास जो कुछ
भी होता है वह क्यों होता है.
“दादी” – उसने पूछा – “आग क्यों जलती है?”
दादी की रसोई में बैठा हुआ था. चूल्हे पर बर्तन
चढ़े हुए थे और वह उनमें खाना बनता देखते
हुए बहुत सारी चीज़ों के होने का कारण
तलाश रहा था. वह हमेशा ही यह जानना
चाहता था कि हमारे आसपास जो कुछ
भी होता है वह क्यों होता है.
“दादी” – उसने पूछा – “आग क्यों जलती है?”
यह पहला मौका नहीं था जब उसने अपनी
दादी से वह सवाल पूछा था जिसका जवाब
वह नहीं जानती थी. उसने बच्चे के प्रश्न पर
कोई ध्यान नहीं दिया और खाना बनाने में
जुटी रही.
दादी से वह सवाल पूछा था जिसका जवाब
वह नहीं जानती थी. उसने बच्चे के प्रश्न पर
कोई ध्यान नहीं दिया और खाना बनाने में
जुटी रही.
चूल्हे में जल रही आग पर एक पुरानी केतली
रखी हुई थी. केतली के भीतर पानी उबलना
शुरू हो गया था और उसकी नाली से भाप
निकलने लगी थी. थोडी देर में केतली हिलने
लगी और उसकी नली से जोरों से भाप
बाहर निकलने लगी. बच्चे ने जब केतली
का ढक्कन उठाकर अन्दर झाँका तो उसे
उबलते पानी के सिवा कुछ और दिखाई
नहीं दिया.
रखी हुई थी. केतली के भीतर पानी उबलना
शुरू हो गया था और उसकी नाली से भाप
निकलने लगी थी. थोडी देर में केतली हिलने
लगी और उसकी नली से जोरों से भाप
बाहर निकलने लगी. बच्चे ने जब केतली
का ढक्कन उठाकर अन्दर झाँका तो उसे
उबलते पानी के सिवा कुछ और दिखाई
नहीं दिया.
“दादी, ये केतली क्यों हिल रही है?” – उसने पूछा.
“उसमें पानी उबल रहा है बेटा”.
“हाँ, लेकिन उसमें कुछ और भी है! तभी तो
उसका ढक्कन हिल रहा है और आवाज़ कर रहा है”.
उसका ढक्कन हिल रहा है और आवाज़ कर रहा है”.
दादी हंसकर बोली – “अरे, वो तो भाप है.
देखो भाप कितनी तेजी से उसकी नली से
निकल रही है और ढक्कन को हिला रही है”.
देखो भाप कितनी तेजी से उसकी नली से
निकल रही है और ढक्कन को हिला रही है”.
“लेकिन आपने तो कहा था कि उसमें सिर्फ
पानी है. तो फिर भाप ढक्कन को कैसे हिलाने लगी?”
पानी है. तो फिर भाप ढक्कन को कैसे हिलाने लगी?”
“बेटा, भाप पानी के गरम होने से बनती है.
पानी उबलने लगता है तो वो तेजी से बाहर
निकलती है” – दादी इससे बेहतर नहीं समझा
सकती थी.
पानी उबलने लगता है तो वो तेजी से बाहर
निकलती है” – दादी इससे बेहतर नहीं समझा
सकती थी.
बच्चे ने दोबारा ढक्कन उठाकर देखा तो उसे
पानी ही उबलता हुआ दिखा. भाप केवल
केतली की नली से बाहर आती ही दिख रही थी.
पानी ही उबलता हुआ दिखा. भाप केवल
केतली की नली से बाहर आती ही दिख रही थी.
“अजीब बात है!” – बच्चा बोला – “भाप में
तो ढक्कन को हिलाने की ताकत है. दादी,
आपने केतली में कितना पानी डाला था?”
तो ढक्कन को हिलाने की ताकत है. दादी,
आपने केतली में कितना पानी डाला था?”
“बस आधा लीटर पानी डाला था, जेमी बेटा”
“अच्छा, यदि सिर्फ इतने से पानी से
निकलनेवाली भाप में इतनी ताकत है
तो बहुत सारा पानी उबलने पर तो बहुत
सारी ताकत पैदा होगी! तो हम उससे
भारी सामान क्यों नहीं उठाते? हम उससे
पहिये क्यों नहीं घुमाते?”
निकलनेवाली भाप में इतनी ताकत है
तो बहुत सारा पानी उबलने पर तो बहुत
सारी ताकत पैदा होगी! तो हम उससे
भारी सामान क्यों नहीं उठाते? हम उससे
पहिये क्यों नहीं घुमाते?”
दादी ने कोई जवाब नहीं दिया. उसने सोचा
कि जेमी के ये सवाल किसी काम के नहीं हैं.
जेमी बैठा-बैठा केतली से निकलती भाप
को देखता रहा.
कि जेमी के ये सवाल किसी काम के नहीं हैं.
जेमी बैठा-बैठा केतली से निकलती भाप
को देखता रहा.
भाप में कैसी ताकत होती है और उस ताकत
को दूसरी चीज़ों को चलाने और घुमाने में कैसे
लगाया जाए, जेम्स वाट नामक वह स्कॉटिश
बालक कई दिनों तक सोचता रहा. केतली
की नली के आगे तरह-तरह की चरखियां
बनाकर उसने उन्हें घुमाया और थोड़ा
बड़ा होने पर उनसे छोटे-छोटे यंत्र भी
चलाना शुरू कर दिया. युवा होने पर तो
वह अपना पूरा समय भाप की शक्ति के
अध्ययन में लगाने लगा.
को दूसरी चीज़ों को चलाने और घुमाने में कैसे
लगाया जाए, जेम्स वाट नामक वह स्कॉटिश
बालक कई दिनों तक सोचता रहा. केतली
की नली के आगे तरह-तरह की चरखियां
बनाकर उसने उन्हें घुमाया और थोड़ा
बड़ा होने पर उनसे छोटे-छोटे यंत्र भी
चलाना शुरू कर दिया. युवा होने पर तो
वह अपना पूरा समय भाप की शक्ति के
अध्ययन में लगाने लगा.
“भाप में तो कमाल की ताकत है!” – वह स्वयं
से कहता था – “किसी दानव में भी इतनी
शक्ति नहीं होती. अगर हम इस शक्ति
को काबू में करके इससे अपने काम करना
सीख लें तो हम इतना कुछ कर सकते हैं
जो कोई सोच भी नहीं सकता. ये सिर्फ
भारी वजन ही नहीं उठाएगी बल्कि
बड़े-बड़े यंत्रों को भी गति प्रदान करेगी.
ये विराट चक्कियों को घुमाएगी और
नौकाओं को चलाएगी. ये चरखों को
भी चलाएगी और खेतों में हलों को भी धक्का
देगी. हजारों सालों से मनुष्य इसे प्रतिदिन
खाना बनाते समय देखता आ रहा है लेकिन
इसकी उपयोगिता पर किसी का भी ध्यान
नहीं गया. लेकिन भाप की शक्ति को वश में
कैसे करें, यही सबसे बड़ा प्रश्न है”.
से कहता था – “किसी दानव में भी इतनी
शक्ति नहीं होती. अगर हम इस शक्ति
को काबू में करके इससे अपने काम करना
सीख लें तो हम इतना कुछ कर सकते हैं
जो कोई सोच भी नहीं सकता. ये सिर्फ
भारी वजन ही नहीं उठाएगी बल्कि
बड़े-बड़े यंत्रों को भी गति प्रदान करेगी.
ये विराट चक्कियों को घुमाएगी और
नौकाओं को चलाएगी. ये चरखों को
भी चलाएगी और खेतों में हलों को भी धक्का
देगी. हजारों सालों से मनुष्य इसे प्रतिदिन
खाना बनाते समय देखता आ रहा है लेकिन
इसकी उपयोगिता पर किसी का भी ध्यान
नहीं गया. लेकिन भाप की शक्ति को वश में
कैसे करें, यही सबसे बड़ा प्रश्न है”.
एक के बाद दूसरा, वह सैकडों प्रयोग करके
देखता गया. हर बार वह असफल रहता
लेकिन अपनी हर असफलता से उसने
कुछ-न-कुछ सीखा. लोगों ने उसका मजाक
उड़ाया – “कैसा मूर्ख आदमी है जो यह
सोचता है कि भाप से मशीनें चला सकता है!”
देखता गया. हर बार वह असफल रहता
लेकिन अपनी हर असफलता से उसने
कुछ-न-कुछ सीखा. लोगों ने उसका मजाक
उड़ाया – “कैसा मूर्ख आदमी है जो यह
सोचता है कि भाप से मशीनें चला सकता है!”
लेकिन जेम्स वाट ने हार नहीं मानी.
कठोर परिश्रम और लगन के फलस्वरूप
उन्होंने अपना पहला स्टीम इंजन बना
लिया. उस इंजन के द्वारा उन्होंने भांति-भांति
के कठिन कार्य आसानी से करके दिखाए.
उनमें सुधार होते होते एक दिन भाप के
इंजनों से रेलगाडियां चलने लगीं. लगभग
200 सालों तक भाप के इंजन सवारियों
को ढोते रहे और अभी भी कई देशों में
भाप के लोकोमोटिव चल रहे हैं.
कठोर परिश्रम और लगन के फलस्वरूप
उन्होंने अपना पहला स्टीम इंजन बना
लिया. उस इंजन के द्वारा उन्होंने भांति-भांति
के कठिन कार्य आसानी से करके दिखाए.
उनमें सुधार होते होते एक दिन भाप के
इंजनों से रेलगाडियां चलने लगीं. लगभग
200 सालों तक भाप के इंजन सवारियों
को ढोते रहे और अभी भी कई देशों में


