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9 NOVEMBER IN INDIA AND WORLD HISTORY IN HINDI- भारत और विश्व के इतिहास में 9 नवम्बर

भारत एवं विश्व में 9 नवम्बर को अनेक घटनाये घटी जिसमे महत्व पूर्ण घटनाये इस प्रकार है 

(1) 9 नवम्बर 1989 को  के दिन बर्लिन की दीवार ढहाई गई थी. 
बर्लिन की दीवार ने करीब 30 वर्षो  तक न सिर्फ जर्मनों को बल्कि
 पूरी दुनिया को बांट कर रखा.

बर्लिन की दीवार
बर्लिन की दीवार -पश्चिमी बर्लिन और जर्मन 
लोकतांत्रिक गणराज्य के बीच एक अवरोध थी
 जिसने 28 साल तक बर्लिन शहर को पूर्वी 
और पश्चिमी टुकड़ों में विभाजित करके रखा।
 इसका निर्माण 13 अगस्त 1961 को शुरु हुआ 
और 9 नवम्बर, 1989 के बाद के सप्ताहों में इसे 
तोड़ दिया गया। बर्लिन की दीवार अन्दरुनी जर्मन
 सीमा का सबसे प्रमुख भाग थी और शीत युद्ध 
का प्रमुख प्रतीक थी।


द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद जब जर्मनी का 
विभाजन हो गया, तो सैंकड़ों कारीगर 
और व्यवसायी प्रतिदिन पूर्वी बर्लिन
 को छोड़कर पश्चिमी बर्लिन जाने लगे।
 बहुत से लोग राजनैतिक कारणों से भी
 समाजवादी पूर्वी जर्मनी को छोड़कर
 पूँजीवादी पश्चिमी जर्मनी जाने लगे । 
इससे पूर्वी जर्मनी को आर्थिक और राजनैतिक 
रूप से बहुत हानि होने लगी। बर्लिन दीवार
 का उद्देश्य इसी प्रवासन को रोकना था। इस
 दीवार के विचार की कल्पना वाल्टर उल्ब्रिख़्त 
के प्रशासन ने की और सोवियत नेता निकिता 
ख्रुश्चेव ने इसे मंजूरी दी।बर्लिन की दीवार 
बनने से यह प्रवास बहुत कम हो गया - 1949
 और 1962 के बीच में जहाँ 25 लाख लोगों ने 
प्रवास किया वहीं 1962 और 1989 के बीच केवल
 5,000 लोगों ने। लेकिन इस दीवार का बनना 
समाजवादी गुट के प्रचार तंत्र के लिए बहुत बुरा
 साबित हुआ। पश्चिम के लोगों के लिए यह समाजवादी
 अत्याचार का प्रतीक बन गई, खास तौर पर जब 
बहुत से लोगों को सीमा पार करते हुए गोली मार दी 
गई। बहुत से लोगों ने सीमा पार करने के अनोखे 
तरीके खोजे - सुरंग बनाकर, गरम हवा के गुब्बारों
 से, दीवार के ऊपर गुजरती तारों पर खिसककर, 
या तेज रफ्तार गाड़ियों से सड़क अवरोधों को 
तोड़ते हुए।
1980 के दशक में सोवियत आधिपत्य के पतन होने
 से पूर्वी जर्मनी में राजनैतिक उदारीकरण शुरू हुआ 
और सीमा नियमों को ढीला किया गया। इससे पूर्वी 
जर्मनी में बहुत से प्रदर्शन हुए और अंततः सरकार
 का पतन हुआ। 9 नवम्बर 1989 को घोषणा की 
गई कि सीमा पर आवागमन पर से रोक हटा दी
 गई है। पूर्वी और पश्चिमा बर्लिन दोनों ओर से 
लोगों के बड़े बड़े समूह बर्लिन की दीवार को 
पारकर एक-दूसरे से मिले। अगले कुछ सप्ताहों 
में उल्लास का माहौल रहा और लोग धीरे-धीरे
 दीवार के टुकड़े तोड़कर यादगार के लिए ले गए
। बाद में बड़े उपकरणों का प्रयोग करके इसे 
ढहा दिया गया।

बर्लिन दीवार के गिरने से पूरे जर्मनी में राष्ट्रवाद
 का उदय हुआ और पूर्वी जर्मनी के लोगों ने जर्मनी
के पुनरेकीकरण के लिए मंजूरी दे दी। 3 अक्टूबर
 1990को जर्मनी फिर से एक हो गया।

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